किराया रसीद › HRA के लिए किराया रसीद
HRA क्लेम के लिए किराया रसीद
अगर आपकी सैलरी में House Rent Allowance (HRA) है और आप किराये के मकान में रहते हैं, तो HRA का कुछ हिस्सा इनकम टैक्स से मुक्त हो सकता है। एम्प्लॉयर यह फ़ायदा किराये का सबूत देखकर ही देता है, और किराया रसीदें इसका मुख्य सबूत हैं।
एम्प्लॉयर क्या माँगता है
- किराया रसीदें जिन महीनों का आप क्लेम करते हैं, मकान मालिक के सिग्नेचर के साथ।
- मकान मालिक का PAN जब साल का कुल किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो। इसके बिना एम्प्लॉयर आमतौर पर इससे ऊपर HRA की छूट नहीं देता।
- रेंट एग्रीमेंट: कई एम्प्लॉयर इसे माँगते हैं, और वैसे भी इसका होना अच्छा है।
- डिक्लेरेशन Form 124 पर (जिसने अप्रैल 2026 से Form 12BB की जगह ली), या एम्प्लॉयर के अपने फ़ॉर्म पर, जिसमें किराया, मकान मालिक का नाम, पता, PAN और मकान मालिक से आपका रिश्ता लिखा हो।
एम्प्लॉयर आमतौर पर ये सबूत जनवरी से मार्च के बीच लेते हैं। तारीख निकल जाए, तो एम्प्लॉयर ऐसे टैक्स काटता है जैसे आपको HRA की कोई छूट नहीं। आप फिर भी इसे अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम कर सकते हैं, पर वही सबूत तैयार रखने होंगे।
पुरानी रिजीम या नई रिजीम: यही सब तय करता है
| पुरानी टैक्स रिजीम | नई टैक्स रिजीम | |
|---|---|---|
| HRA की छूट | हाँ, तीन रकम वाले नियम से | नहीं |
| सैलरी के टैक्स में किराया रसीद काम की? | हाँ | नहीं |
| सैलरी वालों के लिए डिफ़ॉल्ट | सिर्फ़ अगर आप इसे चुनें | हाँ |
नई रिजीम डिफ़ॉल्ट है। इसमें HRA की कोई छूट नहीं, इसलिए किराया रसीदों से सैलरी से कटने वाला टैक्स कम नहीं होता। ये सिर्फ़ तब काम आती हैं जब आप पुरानी रिजीम चुनें। अगर आप ज़्यादा किराया देते हैं और साथ में होम लोन का ब्याज, बीमा, PPF जैसी छूटें भी हैं, तो पुरानी रिजीम में कम टैक्स लग सकता है; नहीं तो आमतौर पर नई रिजीम बेहतर रहती है, खासकर क्योंकि नई रिजीम में करीब ₹12 लाख तक की इनकम पर टैक्स नहीं (स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ सैलरी वालों के लिए ₹12.75 लाख)। एम्प्लॉयर को बताने से पहले दोनों का हिसाब लगाएँ, या अपने अकाउंटेंट से पूछें।
खास मामले
- माता-पिता को किराया। चलता है जब आप सच में किराया दें, मकान माता-पिता के नाम हो और वे किराये को अपनी टैक्स रिटर्न में इनकम दिखाएँ। बैंक से दें ताकि सबूत रहे। अप्रैल 2026 से, जब किराया सालाना ₹1,00,000 से ज़्यादा हो, तो HRA डिक्लेरेशन (Form 124) में मकान मालिक से अपना रिश्ता भी बताना होता है।
- पति या पत्नी को किराया। टैक्स डिपार्टमेंट आमतौर पर इसे नहीं मानता, क्योंकि पति-पत्नी आमतौर पर साथ रहते हैं। पहले अपने अकाउंटेंट से पूछें।
- फ़्लैट शेयर करने वाले दो लोग। हर एक अपने हिस्से के किराये की अपनी रसीदें बनाता है।
- ₹50,000 महीने से ज़्यादा किराया। किरायेदार, चाहे आम व्यक्ति हो, किराये से TDS काटकर जमा करेगा। अभी का रेट और फ़ॉर्म किसी अकाउंटेंट से पूछें।
- सैलरी में HRA नहीं (अपना काम करने वाले या जिनकी सैलरी में HRA नहीं): पुरानी रिजीम में किराये की एक अलग, छोटी छूट है। आपको मिल सकती है या नहीं, आपका अकाउंटेंट बता सकता है।
किराया देने का सुरक्षित तरीका
बैंक ट्रांसफ़र या UPI से ऐसा सबूत बनता है जो हर रसीद से मेल खाता है। कैश चलता है, पर अगर टैक्स डिपार्टमेंट कभी पूछे तो रसीद ही आपका अकेला सबूत है, और ₹5,000 से ज़्यादा कैश पर रसीद पर रेवेन्यू स्टैम्प चाहिए (देखें किराया रसीद पर रेवेन्यू स्टैम्प)।