किराया रसीद › HRA छूट का कैलकुलेशन
HRA छूट: इसका हिसाब कैसे होता है
आपका पूरा HRA टैक्स-फ़्री नहीं होता। छूट वाला हिस्सा तीन रकमों में से सबसे छोटी रकम है, और बाकी आपकी टैक्स वाली सैलरी में जुड़ता है। यहाँ असली आँकड़ों के साथ नियम है, ताकि आप अपने एम्प्लॉयर का हिसाब जाँच सकें।
तीन रकम वाला नियम (पुरानी टैक्स रिजीम)
जिन महीनों में आप किराये के मकान में रहे और किराया दिया, उनके लिए HRA की छूट इनमें से सबसे कम रकम है:
- एम्प्लॉयर से असल में मिला HRA।
- दिया गया किराया, घटा सैलरी का 10%।
- अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे या अहमदाबाद में रहते हैं तो सैलरी का 50% (आखिरी चार शहर Income-tax Rules, 2026 ने अप्रैल 2026 से जोड़े); बाकी जगहों पर 40%, नोएडा, गुरुग्राम और दूसरे सैटेलाइट शहरों समेत।
यहाँ "सैलरी" का मतलब है बेसिक पे और रिटायरमेंट फ़ायदों में गिना जाने वाला महँगाई भत्ता (DA), और अगर मिलता है तो बिक्री के तय प्रतिशत वाला कमीशन। बाकी भत्ते शामिल नहीं होते।
हल किया हुआ उदाहरण 1: लुधियाना
रोहित लुधियाना में काम करता है। हर महीने: बेसिक ₹40,000, DA नहीं, HRA ₹16,000। वह पूरे साल ₹15,000 महीना किराया देता है।
| रकम | साल भर की |
|---|---|
| सैलरी (बेसिक): ₹40,000 × 12 | ₹4,80,000 |
| 1. मिला HRA: ₹16,000 × 12 | ₹1,92,000 |
| 2. किराया ₹1,80,000 घटा सैलरी का 10% ₹48,000 | ₹1,32,000 |
| 3. सैलरी का 40% (मेट्रो नहीं) | ₹1,92,000 |
| छूट वाला HRA (तीनों में सबसे कम) | ₹1,32,000 |
| टैक्स वाला HRA: ₹1,92,000 − ₹1,32,000 | ₹60,000 |
किराया साल का ₹1,80,000 है, ₹1,00,000 से ज़्यादा, इसलिए रोहित को रसीदों पर मकान मालिक का PAN चाहिए।
हल किया हुआ उदाहरण 2: दिल्ली, ज़्यादा किराया
दिल्ली में नेहा: महीने का बेसिक ₹50,000 और DA ₹5,000 (सैलरी ₹55,000), HRA ₹22,000, किराया ₹30,000 महीना।
| रकम | साल भर की |
|---|---|
| सैलरी: ₹55,000 × 12 | ₹6,60,000 |
| 1. मिला HRA: ₹22,000 × 12 | ₹2,64,000 |
| 2. किराया ₹3,60,000 घटा ₹66,000 | ₹2,94,000 |
| 3. सैलरी का 50% (दिल्ली) | ₹3,30,000 |
| छूट वाला HRA | ₹2,64,000 (पूरा) |
यहाँ पूरा HRA छूट में है, क्योंकि मिला HRA ही सबसे कम रकम है। ज़्यादा किराया देने से और टैक्स नहीं बचेगा।
जिन बातों से जवाब बदलता है
- साल का कुछ हिस्सा। जिन महीनों में किराया दिया, उनका महीने-दर-महीने हिसाब लगाएँ। अगर साल के बीच शहर बदला या सैलरी बदली, तो हर अवधि का हिसाब उसके अपने आँकड़ों से होता है।
- किराया सैलरी के 10% से कम। रकम 2 ज़ीरो हो जाती है, इसलिए HRA की कोई छूट नहीं।
- अपने मकान में रहना। किराया नहीं दिया तो HRA की छूट नहीं।
- नई टैक्स रिजीम। आँकड़े कुछ भी हों, HRA की कोई छूट नहीं। देखें HRA के लिए किराया रसीद।
एम्प्लॉयर इसका क्या करता है
आप किराया रसीदें और डिक्लेरेशन दे दें, तो पेरोल साल भर का छूट वाला HRA निकालता है, टैक्स की बचत बाकी महीनों में बाँटता है और छूट की रकम आपके सालाना TDS सर्टिफ़िकेट में दिखाता है। अगर रसीदें पेरोल तक देर से पहुँचें, तो बचत आखिरी महीनों में एक साथ मिलती है, या आप इसे अपनी रिटर्न में क्लेम करते हैं।